मंदिर
ISKCON मंदिर द्वारका
कृष्ण और रुक्मिणी को समर्पित पत्थर से बना ISKCON मंदिर, द्वारकाधीश से छोटी पैदल — वैदिक कक्षाओं और पूरी दैनिक आरती सूची के लिए जाना जाता है।
समय
सुबह: 5:00 AM – 12:00 PM | शाम: 4:00 PM – 9:00 PM
दूरी
द्वारकाधीश मंदिर से 1 km, देवी भवन रोड पर
प्रवेश शुल्क
निःशुल्क प्रवेश
उपयुक्त समय
अक्टूबर – मार्च; मंगला आरती के लिए सुबह जल्दी
श्री श्री रुक्मिणी देवी द्वारकाधीश धाम — ISKCON मंदिर — मुख्य द्वारकाधीश मंदिर से लगभग एक किलोमीटर है और विश्व के उन कम ISKCON मंदिरों में है जो पूरी तरह पत्थर से बने हैं। 1996 में HH महाविष्णु गोस्वामी महाराज द्वारा स्थापित, यह आरती और भागवत कक्षाओं की पूरी दैनिक सूची चलाता है और भीड़ वाले मुख्य मंदिर का शांत विकल्प देता है।
इतिहास
HH महाविष्णु गोस्वामी महाराज 1990 के दशक में श्रील प्रभुपाद के भागवत अध्ययन के लिए द्वारका आए और नगर में ISKCON मंदिर बनाना चाहा, यद्यपि धन नहीं था। दान माँगने की जगह वे भक्ति से भागवत अध्ययन और पाठ जारी रखे, और भारतीय भवन के एक स्थानीय परिवार ने बाद में परियोजना के लिए अपना धर्मशाला दिया — वर्तमान मंदिर की उत्पत्ति। रेत और चूना पत्थर से पारंपरिक शैली में बना, विश्वभर ISKCON मंदिरों में पूरी तरह पत्थर से बना यह अनूठा बना हुआ है।
राधा-कृष्ण विग्रह और मंदिर वास्तुकला
मंदिर के गर्भगृह में भगवान कृष्ण और राधा के सुंदर सजे विग्रह हैं, साथ ISKCON परंपरा की कृष्ण और उनकी संगिनी रुक्मिणी भक्ति से जुड़ी छवियाँ। पत्थर निर्माण, शांत प्रांगण और परिसर के कुछ हिस्सों से अरब सागर की झलक पास भीड़ वाले द्वारकाधीश मंदिर से अलग वातावरण देते हैं, और छत द्वारकाधीश शिखर की ओर दृश्य देती है। मंदिर नगर केंद्र के पास ठहरने वाले यात्रियों के लिए गेस्ट हाउस भी चलाता है।
समय
मंदिर विश्वभर ISKCON केंद्रों जैसी आरती और कक्षाओं की संरचित दैनिक सूची मानता है, सामान्य दर्शन घंटों के साथ:
- दर्शन घंटे: 5:00 AM – 12:00 PM और 4:00 PM – 9:00 PM
- मंगला आरती: सुबह जल्दी, दिन की पहली विधि
- श्रीमद्भागवत कक्षा: मध्य सुबह, वैदिक शिक्षा में रुचि रखने वाले आगंतुकों के लिए खुली
- शाम आरती: मंदिर रात बंद होने से पहले
कक्षा और आरती का ठीक समय मौसम से थोड़ा सरक सकता है, इसलिए विशिष्ट विधि में बैठना हो तो पहुँच पर मंदिर कार्यालय जाँचना ठीक है।
वैदिक कार्यक्रम और गतिविधियाँ
ISKCON मंदिर नियमित श्रीमद्भागवत अध्ययन सत्र चलाता है, भक्तों और जिज्ञासु आगंतुकों दोनों के लिए खुले। ये मध्य-सुबह कक्षाएँ वैदिक शास्त्र और ISKCON संस्थापक श्रील प्रभुपाद की शिक्षाएँ खोलती हैं। आरती समय कीर्तन (भक्ति गान) सत्र होते हैं और भागीदारी के लिए खुले हैं।
मंदिर जन्माष्टमी, राधाष्टमी और अन्य वैष्णव पर्वों के उत्सव भी आयोजित करता है, विशेष सजावट, विस्तारित दर्शन घंटे और सामुदायिक भोज के साथ। गेस्ट हाउस उन यात्रियों को ठहराता है जो मंदिर के पास रहकर अध्ययन, कीर्तन और सेवा के दैनिक कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं।
कैसे पहुँचें
मंदिर द्वारकाधीश मंदिर से लगभग 1 km है, देवी भवन रोड पर।
- पैदल: मुख्य मंदिर से नगर गलियों से 10–15 मिनट पैदल।
- ऑटो-रिक्शा: द्वारकाधीश मंदिर क्षेत्र से छोटी सवारी ₹30–₹50।
- टैक्सी: रुक्मिणी मंदिर और स्वामीनारायण मंदिर के साथ स्थानीय द्वारका दर्शनीय परिक्रमा पर पड़ाव के रूप में सहज जोड़ा जाता है।
आगंतुकों के लिए ISKCON दैनिक कार्यक्रम
जगत मंदिर की भागमभाग से अलग, ISKCON मंदिर द्वारका मंगला आरती, दर्शन, भागवत कक्षा और शाम कीर्तन की प्रकाशित लय चलाता है — पूरा सत्र बैठना हो तो डेस्क पर जाँचना लायक है। पत्थर निर्माण गर्मी दोपहर गर्भगृह को पास के कई मंदिरों से ठंडा रखता है। जन्माष्टमी और सर्दी तीर्थ चरम पर गेस्ट-हाउस कमरे भरते हैं; देवी भवन रोड पर ठहरने की आशा हो तो जल्दी पूछें। प्रसाद निरंतर नहीं, निर्धारित समय पर उपलब्ध — दिन का अर्पण कब खत्म होता है पूछें। जूता रैक बाहर हैं; सभा में घुसने से पहले फोन मौन करें। वैष्णव वेश नियम लागू: कंधे और घुटने ढके, उस दिन सुरक्षा सख्त हो तो भीतरी खंडों में चमड़ा नहीं।
द्वारकाधीश से पैदल मार्ग
मुख्य मंदिर से एक-किलोमीटर पैदल आवासीय गलियों और छोटी दुकानों से गुजरती है — दिन में सुरक्षित और यात्रियों से अच्छी तरह चली हुई। स्वर्ग द्वार के पास त्योहार जाम में ऑटो से पैदल स्थलचिह्न आसान हैं। कई आगंतुक द्वारकाधीश सुबह दर्शन, मध्य सुबह कक्षा के लिए ISKCON पैदल, फिर रुक्मिणी मंदिर और स्वामीनारायण मंदिर की ओर जारी रखते हैं, ऑटो से लौटने से पहले। गतिशीलता सीमित हो तो एक तरफ़ ₹30–₹50 ऑटो हॉप और ढलान पर पैदल वापसी अच्छी बैठती है।
त्योहार सप्ताह और गेस्ट हाउस
जन्माष्टमी और राधाष्टमी सभा को कीर्तन और विस्तारित दर्शन से भरते हैं — उन तिथियों मंगला आरती के लिए जल्दी पहुँचें। देवी भवन रोड गेस्ट हाउस उन यात्रियों के अनुकूल है जो कार्यक्रम के पास कई दिन चाहते हैं; थर्ड-पार्टी साइट नहीं, मंदिर कार्यालय से बुक करें। शाम कीर्तन आगंतुकों के लिए खुला है जो मंत्रों के बीच मौन रखें — व्यस्त जगत मंदिर दर्शन के बाद उपयोगी रीसेट।
इतिहास
श्री श्री रुक्मिणी देवी द्वारकाधीश धाम — द्वारका का ISKCON मंदिर — 1996 में स्थापित हुआ और विश्वभर ISKCON केंद्रों में पूरी तरह पत्थर से बना होने के लिए उल्लेखनीय है। यह प्राचीन द्वारकाधीश मंदिर का वैष्णव पूरक देता है, देवी भवन रोड पर दैनिक कीर्तन, भागवत कक्षाएँ और प्रसाद सेवा के साथ।
समय
दर्शन: 5:00 AM – 12:00 PM और 4:00 PM – 9:00 PM। मंगला आरती 5:00 AM; शाम कीर्तन लगभग 7:00 PM। प्रसाद निर्धारित समय पर परोसा जाता है — निरंतर सेवा न मानें, डेस्क पर पूछें। जन्माष्टमी पर गेस्ट-हाउस कमरे भरते हैं; मंदिर कार्यालय में पूछें।
सुझाव
द्वारकाधीश से आवासीय गलियों 10–15 मिनट पैदल — त्योहार जाम में ऑटो से अक्सर तेज़। कंधे और घुटने ढके; सभा में फोन मौन। जगत मंदिर भीड़ लगे तो यह अच्छा रीसेट है। रुक्मिणी मंदिर और स्वामीनारायण मंदिर पैदल या एक ऑटो लूप पर जोड़ें।
कैसे पहुँचें
स्वर्ग द्वार से देवी भवन रोड आवासीय गलियों 10–15 मिनट पैदल — त्योहार जाम में ऑटो से अक्सर तेज़। मंदिर पट्टी से ऑटो ₹30–₹50। उसी रोड गेस्ट हाउस बहु-दिन ठहराव के अनुकूल; जन्माष्टमी मंदिर कार्यालय से बुक करें। शाम कीर्तन आगंतुकों के लिए खुला है जो मंत्रों के बीच मौन रखें।
डेस्क पर लगी भागवत कक्षा समय त्योहार सप्ताह बदलते हैं — पूरा सत्र बैठने की योजना हो तो जाँचना लायक। पत्थर फर्श गर्भगृह में ठंडे रहते हैं पर दोपहर प्रांगण गर्म होता है।
दैनिक कार्यक्रम जिसके चारों ओर योजना बनानी चाहिए
ISKCON द्वारका वास्तविक सूची चलाता है — केवल एक और कृष्ण मंदिर फोटो पड़ाव नहीं। द्वारकाधीश मंगला के लिए पहले से उठा हूँ तो 4:30 AM मंगला आरती पसंद है; वरना 7:00 AM दर्शन और 12:30 PM राजभोग शांत हैं। शाम कीर्तन लगभग 7:00 PM सभा को उन आगंतुकों से भरता है जिन्होंने दोपहर गर्मी छोड़ी।
| कार्यक्रम | लगभग समय | आगंतुक नोट |
|---|---|---|
| मंगला आरती | ~4:30 AM | पास ठहर रहे हों तो शामिल हों |
| दर्शन | ~7:00 AM – 12:30 PM | प्रवेश पर जूता जमा |
| राजभोग | ~12:30 PM | प्रसाद काउंटर व्यस्त |
| शाम कीर्तन | ~7:00 PM | बिना टिकट |
गेस्ट हाउस कमरे हैं — मंदिर कार्यालय से बुक करें, अनियमित एजेंट नहीं। द्वारकाधीश तरफ़ से पिछली गलियों 15–20 मिनट पैदल; त्योहार ट्रैफिक में ऑटो ₹30–₹50।
पुस्तकें, उपहार और कक्षा सूची
पुस्तक काउंटर गीता और बच्चों की कृष्ण कथाएँ ₹50–₹500 रखता है — तय दाम, अच्छी गुणवत्ता। भागवत कक्षा समय डेस्क से पूछें; शाम सत्र विदेशी आगंतुकों के लिए कभी अंग्रेज़ी में चलते हैं। दान पेटी वैकल्पिक; अन्नक्षेत्र सेवा संस्कृति पर चलता है — खाएँ तो निकास के पास पेटी में ₹51+ योगदान सोचें।
मंदिर पट्टी से कैसे पहुँचें
द्वारकाधीश से Lane Road और पिछली गलियों 15–20 मिनट पैदल — दिन सुरक्षित। गर्मी या सामान हो तो ऑटो ₹30–₹50। गेट पार्किंग सीमित; ड्राइवर साइड स्ट्रीट ₹20–₹30 टिप 30 मिनट प्रतीक्षा करते हैं। दोपहर भीड़ बिना दो कृष्ण अनुभव चाहिए तो सुबह द्वारकाधीश दर्शन को ISKCON राजभोग से जोड़ें।
इतिहास — कृष्ण की नगरी में ISKCON
ISKCON ने यह केंद्र प्राचीन द्वारकाधीश पूजा के साथ भागवत परंपरा प्रस्तुत करने के लिए स्थापित किया — प्रतिस्पर्धा नहीं, कई अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों के लिए पूरक। राधा-कृष्ण विग्रह गौड़ीय वैष्णव शैली मानते हैं। राज्य से बाहर चचेरे भाई आएँ तो अंग्रेज़ी-मित्र कीर्तन सराहता हूँ।
समय — दैनिक दर्शन खिड़कियाँ
| सत्र | लगभग घंटे | नोट |
|---|---|---|
| सुबह | 7:00 AM – 12:30 PM | राजभोग ~12:30 |
| दोपहर | 12:30 – 4:00 PM | शांत दर्शन |
| शाम | 4:00 – 8:00 PM | कीर्तन ~7 PM |
गेस्ट हाउस चेक-इन आमतौर पर 3 PM; टोट नहीं, मंदिर कार्यालय से बुक करें। दान पेटी स्वैच्छिक; प्रसाद काउंटर तय दाम ₹50–₹200।
सुझाव — वेश और कार्यक्रम
द्वारकाधीश जैसे मर्यादित वस्त्र; शॉर्ट्स नहीं। शाम कीर्तन सभी के लिए खुला — प्रारूप नए हों तो पीछे फर्श पर बैठें। पुस्तकें और प्रसाद काउंटर ₹50–₹500 तय दाम। गेस्ट हाउस केवल कार्यालय से बुक करें।
त्योहार और आगंतुक मिश्रण
जन्माष्टमी सप्ताह विश्वभर ISKCON भक्त खींचता है — संभलने योग्य दर्शन के लिए 6 AM पहुँचें। अंतरराष्ट्रीय आगंतुक रविवार कार्यक्रमों के दौरान अंग्रेज़ी घोषणाएँ सराहते हैं।
द्वारकाधीश से पैदल
Lane Road से 15–20 मिनट पैदल; धूप तेज़ हो तो ऑटो ₹30–₹50। काउंटर राजभोग प्रसाद ₹50–₹100 — तय दाम, मोलभाव नहीं।
प्रसाद और पुस्तकें
मंदिर काउंटर भगवद्गीता और प्रसाद डिब्बे तय दरों पर बेचता है — आमतौर पर एक गीता उन रिश्तेदारों के लिए चुनता हूँ जो तीर्थ में शामिल नहीं हो सके।
संपादक की स्थानीय सलाह
सबसे शांत अनुभव चाहिए तो सुबह जल्दी कार्यक्रम आएँ और दर्शन के बाद थोड़ा रुककर अफवाह नहीं, डेस्क से कक्षा समय पूछें। व्यस्त घंटों पहुँच गलियाँ कार से पैदल आसान हैं, इसलिए कई यात्री मुख्य मंदिर तरफ़ से पैदल आते हैं और ऑटो से लौटते हैं।
आम गलती
आगंतुक अक्सर इसे केवल एक और त्वरित फोटो पड़ाव मानते हैं और चूक जाते हैं कि मंदिर कीर्तन और कक्षाओं वाला वास्तविक दैनिक कार्यक्रम चलाता है जिसके चारों ओर योजना बनानी चाहिए।
जाने से पहले जाँचें
वर्तमान आरती सूची, गेस्ट हाउस पहुँच चाहिए हो तो, और किसी त्योहार कार्यक्रम ने सामान्य दर्शन समय बदला है या नहीं — स्थानीय जाँचें।
योजना सुझाव: खुला 5 AM–12 PM और 4–9 PM। मंगला आरती के लिए जल्दी आएँ। पास रुक्मिणी देवी मंदिर और स्वामीनारायण मंदिर से जोड़ें। दिनवार यात्रा कार्यक्रम →
द्वारका यात्रा की योजना
लेखक
मुख्य संपादक और तीर्थ गाइड · स्वतंत्र द्वारका यात्रा गाइड
अंतिम अपडेट: August 17, 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
द्वारका से जुड़े आम प्रश्न
दर्शन समय, पहुँच, वस्त्र और बजट — यात्री सबसे अधिक यही पूछते हैं।
यह श्री श्री रुक्मिणी देवी द्वारकाधीश धाम है, विश्व के उन कम ISKCON मंदिरों में जो पूरी तरह पत्थर में बने हैं।
केवल 1 km दूर है, देवी भवन रोड पर छोटी 10-मिनट पैदल।
द्वारका के अन्य दर्शनीय स्थल
बेट द्वारका
अरब सागर में कृष्ण का द्वीप-घर — Sudarshan Setu से सड़क द्वारा या Okha की पारंपरिक फेर्री से पहुँचें।
और पढ़ें
Sudarshan Setu
Okha से बेट द्वारका तक भारत का सबसे लंबा केबल-स्टे पुल — इंजीनियरिंग विवरण, कृष्ण-थीम वॉकवे, सोलर पैनल, और यात्री वास्तव में कैसे इस्तेमाल करते हैं।
और पढ़ें
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, द्वारका से 18 km बेट द्वारका मार्ग पर — नगर से दिन की यात्रा का आमतौर पर पहला पड़ाव।
और पढ़ेंद्वारका यात्रा की योजना बना रहे हैं?
दर्शन समय, पहुँचने का मार्ग, पास के मंदिर और ठहरने की जगह — हमने सब एक जगह लिखा है, ताकि आप यात्रा पर ध्यान दे सकें। जय द्वारकाधीश।